Sushil's Blog

All powers are with in you

9 Posts

401 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 17522 postid : 1344374

देश में विपक्ष की आलोचना भी झेलनी पड़ी है

Posted On 4 Aug, 2017 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

नवाज शरीफ पाकिस्तान मुस्लिम लीग के कद्दावर नेता हैं अबकी बार वह तीसरी बार पाकिस्तान के प्रधान मंत्री पद पर आसीन हुये थे| उनके दूसरे कार्यकाल में मई से जुलाई के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच में लड़ा जाने वाला युद्ध कारगिल वार कहलाता है|  युद्ध जरनल मुशर्रफ की महत्वकांक्षा का परिणाम था| ऐसा ही प्रयत्न 1948 में श्री नगर पर कब्जा करने के उद्देश्य से कबायलियों के वेश में नार्थ वेस्ट फ्रंटियर के पाकिस्तानी सैनिकों ने घुसपैठ की थी ऐसा ही कारगिल में हुआ था | नवाज का तीसरा कार्यकाल , भारत के प्रधान मंत्री मोदी जी ने नवाज शरीफ से सम्बन्ध बढ़ाने की हर सम्भव कोशिश की| वार्ता शुरू करवाई, स्वयं उनके गृह क्षेत्र की यात्रा की जिसके लिए उन्हें अपने देश में विपक्ष की आलोचना भी झेलनी पड़ी है |ऐसा माना जाता है प्रजातन्त्रात्मक ढंग से चुनी गयी सरकार से वार्ता करना आसान है लेकिन पाकिस्तान में सेना का स्थान सदैव ऊंचा रहा है निर्णायक भूमिका उसी की रही है सेना अपना वर्चस्व  किसी भी कीमत पर खोने को तैयार नहीं है |नवाज के भाषण में चाहे वह किसी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर दिया गया हो सेना की छाप सदैव नजर आती रही थी |
coffee

नवाज शरीफ पाकिस्तान मुस्लिम लीग के कद्दावर नेता हैं अबकी बार वह तीसरी बार पाकिस्तान के प्रधान मंत्री पद पर आसीन हुये थे| उनके दूसरे कार्यकाल में मई से जुलाई के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच में लड़ा जाने वाला युद्ध कारगिल वार कहलाता है|  युद्ध जरनल मुशर्रफ की महत्वकांक्षा का परिणाम था| ऐसा ही प्रयत्न 1948 में श्री नगर पर कब्जा करने के उद्देश्य से कबायलियों के वेश में नार्थ वेस्ट फ्रंटियर के पाकिस्तानी सैनिकों ने घुसपैठ की थी ऐसा ही कारगिल में हुआ था | नवाज का तीसरा कार्यकाल , भारत के प्रधान मंत्री मोदी जी ने नवाज शरीफ से सम्बन्ध बढ़ाने की हर सम्भव कोशिश की| वार्ता शुरू करवाई, स्वयं उनके गृह क्षेत्र की यात्रा की जिसके लिए उन्हें अपने देश में विपक्ष की आलोचना भी झेलनी पड़ी है |ऐसा माना जाता है प्रजातन्त्रात्मक ढंग से चुनी गयी सरकार से वार्ता करना आसान है लेकिन पाकिस्तान में सेना का स्थान सदैव ऊंचा रहा है निर्णायक भूमिका उसी की रही है सेना अपना वर्चस्व  किसी भी कीमत पर खोने को तैयार नहीं है |नवाज के भाषण में चाहे वह किसी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर दिया गया हो सेना की छाप सदैव नजर आती रही थी |

नवाज शरीफ पाकिस्तान मुस्लिम लीग के कद्दावर नेता हैं अबकी बार वह तीसरी बार पाकिस्तान के प्रधान मंत्री पद पर आसीन हुये थे| उनके दूसरे कार्यकाल में मई से जुलाई के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच में लड़ा जाने वाला युद्ध कारगिल वार कहलाता है|  युद्ध जरनल मुशर्रफ की महत्वकांक्षा का परिणाम था| ऐसा ही प्रयत्न 1948 में श्री नगर पर कब्जा करने के उद्देश्य से कबायलियों के वेश में नार्थ वेस्ट फ्रंटियर के पाकिस्तानी सैनिकों ने घुसपैठ की थी ऐसा ही कारगिल में हुआ था | नवाज का तीसरा कार्यकाल , भारत के प्रधान मंत्री मोदी जी ने नवाज शरीफ से सम्बन्ध बढ़ाने की हर सम्भव कोशिश की| वार्ता शुरू करवाई, स्वयं उनके गृह क्षेत्र की यात्रा की जिसके लिए उन्हें अपने देश में विपक्ष की आलोचना भी झेलनी पड़ी है |ऐसा माना जाता है प्रजातन्त्रात्मक ढंग से चुनी गयी सरकार से वार्ता करना आसान है लेकिन पाकिस्तान में सेना का स्थान सदैव ऊंचा रहा है निर्णायक भूमिका उसी की रही है सेना अपना वर्चस्व  किसी भी कीमत पर खोने को तैयार नहीं है |नवाज के भाषण में चाहे वह किसी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर दिया गया हो सेना की छाप सदैव नजर आती रही थी |

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 2.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran